Sunday, September 16, 2012

तू है तो......

कभी तू मेरे होंटों की हंसी बन मुस्कराए.....
कभी तू मेरी चाहत का गीत बन गुनगुनाये......
कभी तू मेरे आँखों के आंसूं बन छलक जाये.....
कभी तू दर्द का लम्हा बन मेरे एहसास को छू जाये.....
कभी तू अनदेखा सा सपना बन नींदों में आये....
कभी तू यादों का सहारा ले रात रात भर जगाये.....
कभी तू हाथों को जोड़कर मन से मांगी दुआ बन जाये....
कभी तू दिल में बसे हर जज़्बात का मतलब बन जाये.....
तू है तो वक़्त को बस मुट्ठी में बंद कर लेने का जी करता है.......
तू है तो ज़िन्दगी को गले लगा के बस यूँही जी लेने का जी करता है......!!

Friday, August 5, 2011

तेरे लिए मेरे जज्बातों का बयां कुछ शब्दों में


वो आया तो मेरी ख्वाहीशो के परिंदे उड़ने से लगे है...............


उसकी मासुमियत भरी निगाहो मे मेरे दिल के छुपे हसीन ख्वाब जुड़ने से लगे है...............


उसके नन्हे हाथो के स्पर्श मेरे दिल तक देते है दस्तक...............
उसे देख सोचती हूँ मै कि कितनी मै अकेली थी अब तक...................


वो आया तो मेरी ज़िन्दगी फुलो कि महक - सी खिल गयी.........................


उसे पाकर मै एक मां होने के अनकहे एहसास से मिल गई.........................


इसलिये आज कहती हूँ उसकी हर एक ख्वाहिश से मैने अपने ख्वाहीशो को जोड लिया है..........................


मेरी ज़िन्दगी कि किताब के हर अधुरे रस्ते को उसकी मुस्कुरात से एक खुबसुरत सफर की ओर मोड लिया है........................

तनहा तनहा

तनहा तनहा सा हर एक लम्हा... मायूस हर शाम है..........



हर पल शायद अब इस ज़िन्दगी मे खामोशी का ही नाम है..........


जिसके साथ ज़िन्दगी का हर एक पल चाहा था................


आज मुजसे वो कहता है तू मेरे लिये अंजान है...............


जिसकी चाहत को मैने अपने एहसास मे हर वक़्त जीया ..............

आज वो कहता है मुजसे कि तुझमे बस एक अधूरेपन कि पहचान है .............


सब भूल कर जिसे अपने होटो कि हंसी माना...............


आज वोकहताहै तू मेरी ज़िन्दगी मे बस पल दो पल का मेहमान है,...........


दिल के इस वीराने मे है तेरी यादों का पेहरा............


भूल के भी भूल ना पाऊ तुने दिया है ज़ख्म इतना गेहरा...........


चाहत कि इस कश्मकश मे उलझा है मन बावरा...............


दिल के अरमानो में तुझे ही ढूंढे मेरे सावरा.....

wo ek naam ....

मन कि एक बंद किताब के पन्नो पे वो एक नाम आया....


फिर से अपने साथ उनसे बरसो मे मिलने की एक शाम लाया..........


देखा उन्हे सामने तो फिर जज्बातों का एक दौर यादों का एहसास बन आंखो मे छाया.......................


गुजरते पलो कि वो मिठी यादों का मिले जुले एहसास ने फिर से मुझे उनसे मिलाया...........................


जिन आंखो मे खुद के लिये दिखता था अंतरिम प्यार कभी आज उन्ही ने मुझे खुद से अजनबी बनाया.............


जिस मोड पर खडे होकर करी थी शुरुवात उन जज्बातों की ..........................

आज उसी मोड पर उन अनगिनत एहसास से लिखी किताब के उन पन्नो को बिखरा हुआ पाया.....................


उसके घर के आँगन मे जहां खिले थे नये उम्मीद के फूल कभी....................

आज उन्ही खुबसुरत क्यारियो ने काटो कि चुभान का एहसास कराया.....................


जाते- जाते उनकी नजरो से जो हुआ सामना मेरा..........................


टूटती ख्वाहिश और बीखरती उम्मीद के जज्बात के सैलाब को मैने आंखो मे नमी के साथ पाया ..............

Thursday, April 22, 2010

एक अधूरी ख्वाहिश ...............

ख्वाहिशो के पुरे होने का था मुझे इंतज़ार.......

प्यार में डूबी चाहत पर था मुझे ऐतबार........
बंद आँखों में एक तस्वीर छुपा रखी थी............
तेरी यादों के एहसास के साथ तुझे पाने की उम्मीद लगा रखी थी...........

उस उम्मीद की हर एक डोर से था मेरा रिश्ता जुड़ा ....
कभी लगता था तू अपना कभी एक दम जुदा जुदा ......
चाहत के पन्नो पे लिखी कुछ ऐसी अनकही बातें .......
यादों के झरोखों को खोले हुए ऐसे ही कट गयी जाने कितनी रातें ........
पूरी हो ना पाई ये अधूरी दास्ताँ .....
तेरे मेरे बीच जाने क्यूँ आई ऐसी दूरियां ...........
पर फिर भी उन ख्वाहिशो के पुरे होने का करती थी मैं इंतज़ार ....
क्यूंकि हर पल प्यार में डूबी चाहत पर था मुझे ऐतबार ........
भीगी पलकों के बीच तेरे एहसास को छुपा कर रखा था .....
सब की नजरो से छुपकर तुझे मैंने आँखों में बसा के रखा था ......
ज़िन्दगी के हर एक मोड़ ने मुझे कितनी बार हैरान किया .......

तन्हाई ने हमेशा मुझे मुझमे ही हज़ार सवालो के बीच छोड़ दिया ...
कई बार तुझ तक पहुंचू तुझसे लडू तुझसे कह दू ...........
इस कोशिश को मन के अन्दर मैंने दबा के रखा था ..............
दिल के जज्बातों का एक महेल मुझमे मेरे अन्दर मैंने सजा के रखा था .............
इसलिए तुझे ना पाकर मैंने ये जाना है .........
की तू मेरी उम्मीदों और जज्बातों का वो अनकहा फ़साना है ...................
जिसको मन की तस्वीरो से उभर कर मैंने आज पहचाना है ...............

Wednesday, March 31, 2010

एक नन्हा सा सपना मेरी आँखों में पलता है

एक नन्हा सा सपना मेरी आँखों में पलता है...........


नन्हे नन्हे पैरो की आहट लिए जैसे कोई मेरे सामने चलता है...........


उसके होंटों पे किलकारी है .....उसकी अंखियों में नयी उम्मीदों की क्यारी है..............


उसकी हर एक अदा प्यारी है......उसमे ही सिमट गयी जैसे मेरी दुनिया सारी है............


जब सूरज कहीं ढलता है .....हर रात सपनो के रस्ते वो मुझसे आके मिलता है.................



एक नन्हा सा सपना मेरी आँखों में पलता है...........


नन्हे नन्हे पैरो की आहट लिए जैसे कोई मेरे सामने चलता है...........



कभी मुझसे रूठ जाये वो........कभी मुझे मनाये वो..................


कभी नन्हे हाथो से मुझे सहलाये वो..........कभी अपनी अठखेलियो से सताए वो............


चुपके से पास आकर मेरे कानो में वो कहता है.................


मैं और मेरा अक्स माँ तुझमे ही रहता है....................


एक अधुरा एहसास है तेरे अन्दर जिसे मैं पूरा करूँगा...................


एक दिन तेरे आँगन की क्यारी का मैं मेहेकता फूल बनूँगा.............



एक नन्हा सा सपना मेरी आँखों में पलता है...........


नन्हे नन्हे पैरो की आहट लिए जैसे कोई मेरे सामने चलता है...........
 
                                                                                                                                 nish......

Wednesday, March 17, 2010

कुछ लब्जों में दोस्ती और प्यार के एहसास.........

इस दोस्ती से है प्यार कितना मैं लाब्जो में ना कह पाऊं ...................


तेरी मेरी यारी के किस्से मैं किसको सुनाऊं ................................

जब सामने आये तू तेरी बातो में डूब जाऊँ............................

और अकेले में तेरी यादों से खुद को बहलाऊँ ................................

दूर रहकर भी तुझसे दूर ना रह पाऊँ.........................

तेरी दोस्ती तेरी यारी में जी जान लगाऊं.................................

दुआ है ये दिल से वक़्त के साथ बढती जाये ये दोस्ती......................

छोटे छोटे पलों में छिपे है तेरे मेरे दोस्ती और प्यार के मोती....................
इश्क प्यार दोस्ती मोहोब्बत सब तुझमे ही पाया है....................


तू ख्वाब से हकीकत बन मेरी ज़िन्दगी में आया है....................

तेरी चाहत के मुस्कराते एक एक पल का एहसास मुझमे समाया है.................

तुझमे ही है सारी ख़ुशी तू ही प्यार का साया है.............................

तुझे भूल जाऊँ ये कभी होगा ना मुझसे..............................

इस कदर चाहत की डोर ने बांधा है मुझे तुझसे....................

चाह कर भी कभी ना दूर करना मुझे खुदसे....................

टूट कर बिखर जाउंगी लागी ऐसी लगन तुझसे.........................
मैं साथ हू तेरे तू जहाँ जहाँ जायेगा.................


इंतज़ार का हर लम्हा बीतेगा और तू मेरे पास आएगा.............

जाने कैसी होगी वो शाम जब तुझे मेरा मन सामने पायेगा..............

दिल फिर से जी उठेगा शायद उस पल जब तुझमे मेरा एहसास समाएगा..................

बीत जायेंगे ये दिन भी और फिर नए रास्तो का सफ़र एक दूजे के साथ प्यार me बीतता जायेगा..........
आँखों में कल रात एक सपना आया.............


मीठी बाँहों में तेरी मैंने खुद को पाया...................

एहसास और तेरे प्यार की छुअन ने मुझे चुपके से तेरे पास बुलाया..............

नजरो से नज़रे मिली और तू मेरे सामने आया.......................

तेरी आगोश में डूब जाऊँ ये एहसास जगाया....................

दिल छुते छुते तुने मुझे नींद में ही प्यार जताया...................

तड़प है इस एहसास में ये कहके मेरे मन को तुने समझाया.................

चाहत की इस खुबसूरत नींद में मुझे तेरा सपना आया............